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मौत के मुंह से बचे 60 बौद्ध भिक्षु

रिंगझिम। इसे दैवयोग ही कहा जाएगा कि 60 बौद्ध भिक्षुओं ने समय से पहले प्रार्थना समाप्त कर ली थी। वर्ना इनमें से शायद ही कोई जीवित बचता। उत्तरी सिक्किम जिले के रिंगझिम स्थित मठ के जिस कक्ष में बौद्ध भिक्षु प्रार्थना करते हैं, वह पिछले रविवार को आए विनाशकारी भूकंप के दौरान मलबे में तब्दील हो गया है। रिंगझिम मठ में पांच वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु और 55 छात्र रहते हैं। पिछले रविवार को बौद्ध भिक्षुओं ने अपनी प्रार्थना अन्य दिनों की तुलना में आधे घंटे पहले समाप्त कर ली थी। भूकंप शाम 6.10 बजे आया था। मठ के इंस्टीट्यूशन ऑफ बुद्धिस्ट लर्निग के प्रिंसिपल आचार्य प्रेमा दोरजी ने बताया-'यदि प्रार्थना सप्ताह के अन्य दिनों की तरह शाम छह बजे तक चली होती तो बौद्ध भिक्षु मठ के अंदर ही फंस गए होते। हमने मठ के एक भाग को ताश के पत्तों के घर की तरह गिरते हुए देखा। यदि रविवार के अलावा कोई अन्य दिन होता तो हम मलबे के नीचे दब गए होते। हम में से शायद कोई जीवित नहीं बचता।'

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