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"हाइवे" नए ज़माने की नई नेपाली फिल्म

दीपक राई
नेपाली फिल्मो में लगातार हो रहे गुणवत्ता के चलते अब नेपाली भाषी दर्शको को लीक से हटकर नए विषयो पर फिल्मे देखने को मिल रही है , इसकी शुरुआत "कागबेनी" जैसी फिल्मो से हुई और एक के बाद एक युवा सोच अन नेपाली सिनेमा को परिवर्तन के मुहाने पर ले आया है । एक ही कहानी पर तकरीबन एक ही कलाकार को लेकर बनाई जाने वाली रुमझुम फिल्मो ज़माना अब लदता नज़र आ रहा है । पुरानी फिल्मो में मात्र संगीत के पहलू को छोड़कर कुछ याद रखने जैसा नहीं होता था । विशुद्ध बॉलीवुड की नक़ल का कारवां अब थमने चाहिए । नेपाली फिल्मो में आज भी कहानी पर विशेष राशी खर्च नहीं की जा रही है मात्र 20 हज़ार या अधिकतम 1 लाख रुपये ही एक फिल्म के कहानीकार को मिल पाता है जिसका नतीजा घिसी पिटी कहानी । नेपाली फिल्मो को विशेषकर कहानी में ध्यान देनी की ज़रुरत है ना कि फिल्म के प्रमोशन और म्यूजिक लांचिंग में बेफजूल खर्चे के । हाल ही में हालीवुड के दिग्गज निर्माता डेनी ग्लोवर व जोश्लिन बर्न्स के सह निर्माण के बन रही फिल्म "हाइवे " रिलीज़ होने को तैयार है । नेपाल में आये दिन होने वाले चक्का जाम को केन्द्रित करते हुये अलग अलग लोगों के मानवीय रिश्तो का ताना बाना बहुत खूबसूरती से बुना गया है ।

"हाइवे" फिल्म का आधिकारिक प्रोमो

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