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एचएनबी गढ़वाल विवि की खामी छात्रों-शिक्षकों पर भारी

देहरादून एमएससी जूलॉजी के छात्रों को सेमेस्टर सिस्टम भारी पड़ सकता है। विवि के जारी सेमेस्टरवार सिलेबस पर गौर करें तो पहले सेमेस्टर में प्रथम वर्ष का पूरा सिलेबस शामिल किया गया है। इसी तरह दूसरे सेमेस्टर में दूसरे वर्ष का सिलेबस और तीसरे चौथे सेमेस्टर वर्ष में नया सिलेबस है। छात्रों के लिए एक़ वर्ष का सिलेबस एक सेमेस्टर में पूरा कर पाना मुश्किल होगा। साथ ही कॉलेजों में शिक्षकों की कमी के कारण उन पर कोर्स पूरा कराने का दबाव होगा। यह समस्या केवल जूलॉजी ही नहीं अन्य विषयों के साथ भी हो सकती है। एचएनबी गढ़वाल विवि ने इस सत्र से स्नातकोत्तर कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया है। यह व्यवस्था छात्रों के लिए कोर्स को आसान सहज बनाने के लिए की गई थी, लेकिन इससे उलट यह छात्रों पर भारी पड़ रही है। विवि के एमएससी जूलॉजी के लिए जारी सिलेबस से तो यही साबित हो रहा है।

विवि ने प्रथम सेमेस्टर में प्रथम वर्ष के पांचों पेपर्स का सिलेबस रखा है। यही स्थिति दूसरे सेमेस्टर की भी है। डीबीएस पीजी कॉलेज के जूलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एके बियानी ने विवि को सूचित कर सिलेबस का निर्धारण दोबारा कराने की मांग की है। जानकारी यह भी है कि एमए एजुकेशन में भी इस तरह की समस्या सामने आ रही है। डॉ. बियानी का कहना है कि विवि से संबद्ध तमाम संस्थानों में शिक्षकों की कमी है, वहीं छात्रों के लिए भी पूरे वर्ष का सिलेबस एक सेमेस्टर में पूरा कर पाना संभव नहीं है। इस मामले में विवि अब बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाकर दोबारा सिलेबस निर्धारण करने की तैयारी कर रहा है। अन्य विषयों के सिलेबस की भी जांच की जाएगी। कुलपति प्रो. एसके सिंह ने कहा कि कुछ शिकायतें मिली हैं। शिक्षकों की कमी कैंपस में भी है। ऐसे में सिलेबस का निर्धारण नियमों के तहत ही किया जाएगा। इस संबंध में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाकर जल्द फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्र व शिक्षक घबराएं नहीं, सिलेबस सेमेस्टर के अनुसार ही रखा जाएगा।

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